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क्या भारत को चुनौती दे रहा है बांग्लादेश? जानिए पद्मा बैराज प्रोजेक्ट और फरक्का बांध से जुड़ा पूरा मामला

बांग्लादेश ने पद्मा बैराज प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. कहा जा रहा है कि यह कदम भारत के फरक्का बैराज के प्रभाव को कम करने के लिए उठाया गया है. जानिए गंगा जल बंटवारे और इस परियोजना का पूरा मामला.

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Dhiraj Kumar Dhillon

बांग्लादेश ने गंगा नदी (बांग्लादेश में पद्मा) पर बनने वाले “पद्मा बैराज प्रोजेक्ट” को मंजूरी देकर दक्षिण एशिया की राजनीति और जल कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. बड़ी बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले भारत के साथ कोई चर्चा तक नहीं की गई, तो क्या यह भारत के लिए चुनौती है? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक भारत ने भी इस प्रोजेक्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. जानकारों का कहना है ‌कि यह परियोजना भारत के फरक्का बैराज के प्रभाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है. हालांकि बांग्लादेश ने इसे अपना आंतरिक मामला बताते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर भारत से चर्चा की जरूरत नहीं है.

नदियों को जीवित करना और खारा पानी रोकना है उद्देश्य

बांग्लादेश की राष्टीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति (ECNEC) ने इस महत्वकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य दक्षिण- पश्चिमी बांग्लादेश की सूखती नदियों को फिर से जीवित करना और समुद्री खारे पानी के प्रभाव को रोकना है. करीब 24 हजार करोड़ टका की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत 2.1 किमी लंबा मुख्य बैराज बनाया जाएगा. जिसके जरिए हिस्ना-माथागंगा, गराई मधुमती, चंदना बरशिया, बराल और इछामती जैसी नदियों में पानी का बहाव बढ़ाने की योजना है. इससे जल परिवहन बेहतर होगा और सुंदरवन क्षेत्र को मीठा पानी मिल सकेगा. बता दें कि बांग्लादेश अपने दक्षिण-पश्चिम वाले सतखीरा, खुलना और बागेरहाट जैसे जिलों में समुद्री खारे पानी को रोकना चाहता है.

दिसंबर में समाप्त हो रही गंगाजल बंटवारा संधि

जानकारों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है ‌जब भारत और बांग्लादेश के बीच 1966 में हुई गंगाजल बंटवारा संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने जा रही है. वहीं बांग्लादेश का दावा है कि यह परियोजना फरक्का बैराज के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद करेगी. भारत ने 1975 में फरक्का बैराज का निर्माण कोलकाता पोर्ट को बचाने और हुगली नदी की सफाई के लिए किया था. अब पद्मा बैराज परियोजना को लेकर दोनों देशों के बीच जल कूटनीति और रणनीतिक समीकरणों पर नजरें टिक गई हैं.