बांग्लादेश बनने जा रहा है दूसरा पाकिस्तान! क्या है जुलाई चार्टर? जिसपर चिंता जता रहे हैं एक्सपर्ट
बांग्लादेश में बीएनपी की प्रचंड जीत के साथ तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. जनमत संग्रह में 'जुलाई नेशनल चार्टर' को मंजूरी मिली है, जिससे देश के पाकिस्तान की राह पर जाने की आशंका जताई जा रही है.
नई दिल्ली: बांग्लादेश के चुनावी नतीजों ने दक्षिण एशिया में एक नया इतिहास रच दिया है. बीएनपी नेतृत्व वाले गठबंधन ने 210 सीटों पर भारी जीत हासिल कर सत्ता पर कब्जा कर लिया है. तारिक रहमान पिछले 35 वर्षों में देश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं. इस आम चुनाव के साथ ही देश की शासन प्रणाली को बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण जनमत संग्रह भी कराया गया. यद्यपि जनता ने सुधारों का समर्थन किया है, लेकिन विशेषज्ञों ने 'जुलाई चार्टर' पर गंभीर चिंताएं जताई हैं.
चुनाव परिणामों में बीएनपी ने विपक्षी दलों को कड़ी शिकस्त देते हुए अपना दबदबा साबित किया है. तारिक रहमान के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिली 210 सीटों ने यह साफ कर दिया है कि बांग्लादेश की जनता वर्षों के महिला प्रधान शासन के बाद बदलाव चाहती है. रहमान अब देश की बागडोर संभालने के लिए तैयार हैं. हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती 'जुलाई नेशनल चार्टर' के तहत होने वाले व्यापक सुधारों को धरातल पर उतारना है, जिसे बहुमत ने अपनी हरी झंडी दे दी है.
जुलाई नेशनल चार्टर और भविष्य के सुधार
जनमत संग्रह के दौरान 'जुलाई नेशनल चार्टर 2025' को लेकर जनता की राय मांगी गई थी. इस चार्टर का उद्देश्य बांग्लादेश की शासन प्रणाली को जड़ से बदलना है. इसे जुलाई 2024 में हुए छात्र विद्रोह के बाद तैयार किया गया था. इस 84 सूत्री सुधार पैकेज को 270 दिनों के भीतर लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सख्त सीमा तय करने और 100 सीटों वाले एक नए ऊपरी सदन के गठन जैसे बड़े प्रस्ताव शामिल किए गए हैं.
सत्ता का संतुलन और पाकिस्तान का साया
चार्टर में प्रधानमंत्री की शक्तियों को कम कर राष्ट्रपति की भूमिका को अधिक मजबूत बनाने का प्रस्ताव है. विशेषज्ञों को डर है कि यह बदलाव बांग्लादेश को पाकिस्तान जैसी स्थिति में धकेल सकता है. पाकिस्तान के इतिहास में भी सैन्य तख्तापलट के बाद जनरल परवेज मुशर्रफ जैसे तानाशाहों ने राष्ट्रपति पद की शक्तियों को बढ़ाकर लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर किया था. शक्ति के केंद्रीकरण का यह नया प्रयोग यदि विफल रहा, तो यह बांग्लादेश की स्थिरता और कानूनी विरासत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
न्यायपालिका और विद्रोहियों को संरक्षण का वादा
प्रस्तावित सुधारों के तहत न्यायपालिका को पूरी तरह से राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने का वादा किया गया है. इसके अलावा, 'जुलाई फाइटर्स' यानी छात्र विद्रोह में शामिल होने वाले सेनानियों को विशेष कानूनी संरक्षण दिया जाएगा. चार्टर में विपक्षी नेताओं को महत्वपूर्ण संसदीय समितियों का नेतृत्व सौंपने और उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करने का अवसर देने की बात भी कही गई है. हालांकि, ये सुधार सुनने में प्रगतिशील लगते हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि इनसे भविष्य में तारिक रहमान की राहें और कठिन होंगी.