India Pakistan War: क्या होती है बैलिस्टिक मिसाइल? जानें फतह-II के लॉन्च के पीछे की कहानी और इसकी ताकत

Ballistic Missil: पाकिस्तान ने भारत के पड़ोसी देशों के एयरबेस, रावलपिंडी, चकवाल और झंग जिले पर हमले के जवाब में फतह-2 बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया. 7 मई को भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने के बाद से तनाव बढ़ गया है.

Social Media
Ritu Sharma

Ballistic Missil: भारत द्वारा 9-10 मई की रात रावलपिंडी के नूर खान बेस, चकवाल स्थित मुरीद बेस और पंजाब के झंग जिले में रफीकी एयरबेस पर जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने अपनी आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल फतह-II को दागा. यह मिसाइल फतह-I का अपडेटेड वर्जन है, जिसकी रेंज और सटीकता पहले से कहीं ज्यादा बेहतर है. पाकिस्तान ने दावा किया कि इस मिसाइल का निशाना भारत की राजधानी नई दिल्ली थी, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इसे सिरसा में ही नाकाम कर दिया.

क्या होती है बैलिस्टिक मिसाइल?

बता दें कि  बैलिस्टिक मिसाइल वह हथियार है जो प्रक्षेप्य गति से अपने लक्ष्य तक पहुंचती है. इसका मतलब है कि ये मिसाइलें उड़ान के दौरान गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में होती हैं और सिर्फ शुरुआती क्षणों में ही इन्हें थ्रस्ट दिया जाता है. उड़ान के बाकी हिस्से में ये बिना किसी मोटर के, अपने तय पथ पर आगे बढ़ती हैं.

बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रमुख प्रकार-

  • सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल (TBM)- रेंज 300 किमी तक
  • छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM)- 300–1,000 किमी
  • मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM)- 1,000–3,500 किमी
  • अंतरमध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM)- 3,500–5,500 किमी
  • अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM)- 5,500 किमी से अधिक

फतह-II- पाकिस्तान की नई हथियार प्रणाली

बताते चले कि फतह-II एक अत्याधुनिक SRBM है जिसकी रेंज लगभग 250 से 400 किलोमीटर तक मानी जा रही है. इसे 2021 में टेस्ट किया गया था और अब इसे ऑपरेशनल तौर पर पाकिस्तान सेना इस्तेमाल कर रही है. इसमें टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम और इनर्शियल नेविगेशन जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है, जिससे ये उड़ान के बीच भी अपने रास्ते में बदलाव कर सकती है.

इसके अलावा, फतह-II का लक्ष्य दुश्मन के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को जल्दी और सटीकता से ध्वस्त करना होता है. हालांकि इस बार भारत की रडार प्रणाली ने इसे सही वक्त पर डिटेक्ट कर लिया और मिसाइल को सिरसा में ही इंटरसेप्ट कर निष्क्रिय कर दिया, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.