T20 World Cup 2026

पश्चिम बंगाल में 26 लाख वोटर्स निकले फर्जी? SIR पर घमासान के बीच चुनाव आयोग का बड़ा दावा

चुनाव आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में करीब 26 लाख नाम पुराने 2002 के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते.

Pinterest
Reepu Kumari

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसके पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को सुधारने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू किया. इस प्रक्रिया में कई लोगों के नाम पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी दल इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं, लेकिन आयोग का दावा है कि यह कदम सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है. SIR के तहत 6 करोड़ से अधिक एन्यूमरेशन फॉर्म को डिजिटल रूप में बदलकर मैपिंग प्रक्रिया में शामिल किया गया.

इसमें पुराने 2002 के रिकॉर्ड से नाम मिलाना शामिल है. अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में अन्य राज्यों की सूची को भी शामिल किया गया ताकि जांच व्यापक और सही तरीके से हो.

मैपिंग प्रक्रिया का तरीका

मैपिंग प्रक्रिया में मौजूदा मतदाता सूची को पुराने SIR रिकॉर्ड से मिलाया जाता है. इसमें देखा जाता है कि कौन से नाम दोनों सूचियों में मौजूद हैं और क्या माता-पिता के नाम रिकॉर्ड से मेल खाते हैं. जहां मेल मिलता है, वहाँ पहचान स्वतः सत्यापित होती है. इस बार अन्य राज्यों के रिकॉर्ड भी शामिल किए गए हैं, जिससे जांच और व्यापक और सटीक हो सके.

26 लाख मतदाता कौन हैं

प्रारंभिक जांच में पता चला कि करीब 26 लाख मतदाता पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं. इनमें कई लोग या उनके परिवार पहले दूसरे राज्यों में रहते थे और बाद में बंगाल आकर बस गए. डिजिटलाइजेशन के बढ़ने के साथ यह संख्या और बढ़ सकती है. चुनाव आयोग ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि तुरंत उनके नाम हट जाएंगे.

आगे की प्रक्रिया

उन मतदाताओं का डेटा पुराने रिकॉर्ड से मैच न होने पर दस्तावेज-आधारित जांच की जाएगी. जिनका डेटा मैच हो जाएगा, उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी. यह प्रक्रिया आगामी चुनावों से पहले सूची की विश्वसनीयता बढ़ाने और किसी योग्य मतदाता को बाहर किए बिना सटीक सूची सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.

प्रभाव और पारदर्शिता

चुनाव आयोग का यह कदम मतदाता सूची में पारदर्शिता और सटीकता लाने के लिए उठाया गया है. डिजिटलाइजेशन और मैपिंग प्रक्रिया के जरिए भविष्य में फर्जी वोटिंग और विवादों को रोकना लक्ष्य है. अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया सभी योग्य मतदाताओं को सुरक्षित रूप से सूची में बनाए रखने में मदद करेगी.