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तब धमकी नहीं धमाके आए थे, हिल गई थी पूरी दिल्ली, पढ़िए 2005 के सीरियल ब्लास्ट की कहानी

Delhi Serial Blast 2005: साल 2005 में हुए दिल्ली सीरियल ब्लास्ट की यादें हर बार तब ताजा हो जाती हैं जब कोई अचानक धमकी देता है और आम जनता को निशाना बनाने की बात करता है.

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India Daily Live

मई महीने के पहले ही दिन दिल्ली के स्कूलों को धमकियां मिलने से हंगामा मच गया. अचानक देश की राजधानी में मची इस अफरा-तफरी से हर कोई हैरान रह गया. दिल्लावासियों के जेहन में 19 साल पुराने उन बम धमाकों की यादें ताजा हो गईं जिनके चलते पूरी दिल्ली त्राहि-त्राहि कर उठी थी. इन बम धमाकों में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे. दिवाली के आसपास हुए इन बम धमाकों ने दिल्ली के लोगों के दिलो-दिमाग पर ऐसा असर छोड़ा कि अब फर्जी धमकियां भी उन्हें हिलाकर रख देती हैं. 1 मई का पूरा दिन दिल्ली के लोगों के लिए ऐसा ही कुछ गुजरा.

अक्टूबर का महीना खत्म हो ही रहा था और पूरा देश दिवाली के त्योहार की तैयारियों में लगा हुआ था. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास, फिर गोविंदपुरी में एक चलती बस में और फिर सरोजनी नगर मार्केट में हुए लगातार धमाकों ने दिल्ली में बैठी सरकार को हिलाकर रख दिया था. चारों तरफ मची चीख-पुकार के बीच एक के बाद एक हो रहे धमाकों से लोग सन्न रह गए थे. इन धमाकों के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ माना गया था. 

धनतेरस पर दहल गई थी दिल्ली

दिवाली से ठीक पहले धनतेरस के मौके पर 29 अक्टूबर 2005 को पहला धमाका नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास बसे पहाड़गंज के भीड़भाड़ वाले इलाके में हुआ. MS मेडिकोज नाम की एक दुकान के बाहर खड़ी बाइक में बम लगाया गया था. आसपास भीड़ थी और धमाके ने सबकुछ तबाह कर दिया.

अभी दिल्ली को संभलने का मौका भी नहीं मिला था कि कुछ ही मिनट के बाद गोविंदपुरी इलाके में ठीक 6 बजे एक चलती बस में धमाका हुआ. धमाके से ठीक पहले बस कंडक्टर को संदिग्ध बैग दिखा था, बैग को बस से बाहर फेंकने की कोशिश हुई लेकिन धमाका हो गया. गनीमत यह रही कि किसी की जान नहीं गई और कुछ लोग घायल हो गए.

त्योहार के मौके पर दिल्ली की सरोजनी नगर मार्केट में हमेशा की तरह भीड़ थी. 6 बजकर 5 मिनट पर यहां एक ऐसा धमाका हुआ जिसने लगभग 50 लोगों की जान ले ली. यहां भी लावारिस बैग देखा गया, एक व्यापारी भागते हुए पुलिस के पास गया लेकिन पुलिस के आने से पहले ही बम धमाका हो गया. इन तीनों धमाकों में 210 से ज्यादा लोग घायल हो गए. इन तीनों धमाकों को मिलाकर कुल 62 लोग मारे गए. 

दिल्ली क्यों बनी निशाना? 

दरअसल, इस हमले से ठीक 5 साल पहले यानी 22 दिसंबर 2000 को दिल्ली के लाल किले पर आतंकी हमला किया गया था. इस हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरु समेत अन्य आरोपियों की सजा पर 29 अक्टूबर 2005 को फैसला होना था. इसी के चलते सुबह इन आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान ही कोर्ट में पुलिस को फोन आया कि अगर इन लोगों की सजा पर फैसला सुनाया गया तो बम धमाका किया गया. तकनीकी खराबी के चलते फैसला नहीं सुनाया गया लेकिन शाम को ही लगातार धमाके हो गए.

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा कि इस हमले के पीछे आंतकियों का बदला लेना का मकसद था. पुलिस के मुताबिक, तारिक अहमद डार, मोहम्मद रफीक शाह और मोहम्मद हुसैन फाजिल ने मिलकर इन धमाकों की साजिश रची थी.