जम्मू-कश्मीर में बड़े आंदोलन की तैयारी, महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता नजरबंद

आरक्षण नीति को तर्कसंगत बनाने में हो रही देरी के विरोध में शांतिपूर्ण धरने की योजना बना रहे छात्रों के साथ नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से एकजुटता व्यक्त करने के बाद यह एहतियाती कार्रवाई की गई.

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Gyanendra Sharma

कश्मीर:  जम्मू-कश्मीर में मौजूदा आरक्षण नीति के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन से पहले कई नेताओं को रविवार को घर में नजरबंद कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि अपने घरों में बंद रहने वालों में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती, श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी, पीडीपी नेता और पुलवामा विधायक वहीद पारा और श्रीनगर के पूर्व महापौर जुनैद मट्टू शामिल हैं.

आरक्षण नीति को तर्कसंगत बनाने में हो रही देरी के विरोध में शांतिपूर्ण धरने की योजना बना रहे छात्रों के साथ नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से एकजुटता व्यक्त करने के बाद यह एहतियाती कार्रवाई की गई. यह विरोध प्रदर्शन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा इस मुद्दे की जांच के लिए कैबिनेट उप-समिति गठित किए जाने के लगभग एक वर्ष बाद हो रहा है, जिसकी कोई रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है.

इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वहीद पारा ने नजरबंदी को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया और सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आरक्षण नीति जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए "अस्तित्व का मुद्दा" बन गई है.

पारा ने X पर एक पोस्ट में कहा कि छात्रों के साथ मुख्यमंत्री आवास के बाहर इकट्ठा हुए हमें एक साल से अधिक समय हो गया है. दुर्भाग्य से, सरकार की ओर से इस मुद्दे को हल करने की कोई मंशा नहीं दिखाई गई है, जिससे हमारे युवाओं में अनिश्चितता और चिंता और भी बढ़ गई है. 

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने शनिवार देर रात एक पोस्ट में कहा कि उनके आवास के बाहर सशस्त्र पुलिस बल तैनात किए गए हैं. उन्होंने पूछा, "क्या यह छात्रों के समर्थन में हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने के लिए की गई एक पूर्व-नियोजित कार्रवाई है?"

पारा ने यह भी मांग की कि आरक्षण संबंधी कैबिनेट उप-समिति की रिपोर्ट को बिना किसी देरी के सार्वजनिक किया जाए. उन्होंने तर्क दिया कि रिपोर्ट को रोके रखने का कोई औचित्य नहीं है, भले ही उसकी सिफारिशें अभी भी उपराज्यपाल की मंजूरी का इंतजार कर रही हों. छात्र समूहों ने आरक्षण नीति के युक्तिकरण की मांग की है, उनका आरोप है कि लंबे समय तक हुई देरी ने योग्यता आधारित अवसरों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है.