'PoK भारत का अभिन्न अंग, पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए', घातक विरोध प्रदर्शनों पर MEA की प्रतिक्रिया
पिछले कई दिनों से PoJK में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं. इन प्रदर्शनों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और कई गंभीर रूप से घायल हैं.
PoK Protests: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भ्रष्टाचार भाई-भतीजावाद और बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से घातक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. पिछले कई दिनों से PoJK में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं. इन प्रदर्शनों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और कई गंभीर रूप से घायल हैं. भारत ने इन विरोध प्रदर्शनों को लेकर प्रतिक्रिया दी है और कहा कि पीओके में जारी अशांति इस्लामाबाद में दशकों के शोषण और दमन का अनिवार्य परिणाम है. भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है और वहां हो रहे मानवाधिकार के घोर उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जवाब देह ठहराया जाना चाहिए.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओके में पाकिस्तान की कार्रवाई उसके दमनकारी रवैये और उन क्षेत्रों में संसाधनों की व्यवस्थित लूट का स्वाभाविक परिणाम है. उन्होंने कहा कि हमने पीओके में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्ट देखी हैं जिसमें पाक सेना द्वारा नागरिकों पर की गई बर्बरता भी शामिल है. वहां हो रहे दमनकारी मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
घातक प्रदर्शनों में अब तक दर्जनों लोगों की मौत
हाल के वर्षों में पीओके बड़े विरोध प्रदर्शनों का गवाह रहा है. व्यापारियों के संगठन आवामी एक्शन कमेटी (AAC), वकीलों और सामाजिक समूहों और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच बातचीत विफल होने के बाद मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली, रावलकोट और नीलम वैली के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. इन घातक विरोध प्रदर्शनों में अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है और आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.
हम 70 सालों से मौलिक अधिकारों से वंचित
एएसी के नेता शौकत नवाज मीर ने कहा कि हमारा विरोध प्रदर्शन किसी संस्थान के खिलाफ नहीं है केवल उन मौलिक अधिकारों को लेकर है जिनसे हमारे लोगों को पिछले 70 सालों से वंचित रखा जा रहा है. अब बहुत हो गया.
पुलिस और जनता के बीच हो रहे इन घातक विरोध प्रदर्शनों में अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं. बाजार बंद हैं. सार्वजनिक परिवहन ठप है और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है. लोगों की आवाज दबाने के लिए बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां की जा रही हैं.
क्या है विरोध प्रदर्शनों की वजह
पीओके में विरोध प्रदर्शनों की वजह प्रदर्शनकारियों की वो 38 मांगें हैं जिन्हें वादा किए जाने के बावजूद पूरा नहीं किया जा रहा है जबकि कई लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं. कई लोगों में क्षेत्र के राजनीतिक ढांचे के खिलाफ रोष है जिसमें पाकिस्तान के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधायी सीटों को खत्म करना, अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों पर अंकुश लगाना और भ्रष्टाचार व राजनीतिक संरक्षण से निपटने के लिए न्यायपालिका में सुधार शामिल है.
38 सूत्रीय मांगों के चार्टर में व्यापक सामाजिक-आर्थिक राहत की मांग की गई है जिसमें व्यापारियों के लिए कर कटौती, देरी से चल रहीं परियोजनाओं में तेजी, बेहतर स्कूल, अस्पताल, स्थानीय युवाओं के लिए समान रोजगार के अवसर, आपदा प्रभावित परिवारों के लिए आवास और किसानों के लिए उचित नीतियां शामिल हैं.