कोर्ट में लताड़, GST का नोटिस और लाइसेंस कैंसल, आखिर कहां आ गए रामदेव?

Patanjali Misleading Advertisement Case: पतंजलि की मुश्किलें इन दिनों बढ़ती हुई नजर आ रही है. कोर्ट की लताड़, GST का नोटिस, 14 प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध के बाद भी बाबा रामदेव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है.

Purushottam Kumar

Patanjali Misleading Advertisement Case: पतंजलि भ्रामक विज्ञापन मामले में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगातार लताड़ लगाई जाने के बाद जीएसटी विभाग ने अब बड़ी कार्रवाई की है. इस नोटिस में करोड़ों रुपये के टैक्स को लेकर सवाल किए गए हैं.

मिल रही जानकारी के अनुसार जीएसटी इंटेलिजेंस के चंडीगढ़ जोनल यूनिट को ओर से पतंजलि फूड्स को कारण बताओ  नोटिस भेजकर यह पूछा गया है कि कंपनी से 27.46 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट को क्यों नहीं बसूलना चाहिए.

कारण बताओ नोटिस के बारे में जानकारी शेयर करते हुए कंपनी ने इस बात का जवाब मांगा गया है कि उनसे 27.46  करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट को क्यों नहीं बसूलना जाना चाहिए. इसके अलावा इस बात का भी कारण बताने के लिए कहा गया है कि इसके अलावा पेनल्टी क्यों नहीं लगाई जानी चाहिए. कंपनी ने आगे बताया कि इस नोटिस का जवाब देने के लिए हमारे तरफ से जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. 

14 प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध लगाए गए

आपको बताते चलें पतंजलि भ्रामक विज्ञापन विज्ञापन मामले में कंपनी की मुश्किलें लगातार बढ़ती हुई नजर आ रही है. इससे पहले उत्तराखंड औषधि नियंत्रण विभाग के लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने दिव्य फार्मेसी को बड़ा झटका देते हुए कंपनी के 14 प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. कंपनी के इस प्रोडक्ट्स पर भ्रामक विज्ञापन और ड्रग्स व मैजिक रेमेडिक एक्ट का उल्लंघन का आरोप है.

माफीनामा छपवाने से लेकर माफीनामे के साइज पर सवाल

भ्रामक विज्ञापन विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए कहा था जिसके बाद पतंजलि ने अखबारों में माफीनामा छपवाया था. आपको बताते चलें इससे पहले कोर्ट ने कंपनी की ओर से अखबार में छपवाए गए माफीनामे के साईज पर आपत्ति जताई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी से पूछा था कि क्या माफीनामे का आकार उसके विज्ञापन के समान था. इसके जवाब में बाबा रामदेव ने कोर्ट के सामने गिड़गिड़ाते हुए कहा था कि वह अदालत का पूरा सम्मान करता है और अपनी गलतियों को नहीं दोहराएगा. इसी के बाद पतंजलि ने अखबारों में एक और माफीनामा प्रकाशित कराया जो पिछले माफीनामे से बड़ा था.

पतंजलि विज्ञापन मामले में क्या-क्या हुआ?

  • इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि पतंजलि आयुर्वेद अपने उत्पादों के विज्ञापनों में भ्रामक दावे कर रही है.
  • सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई. कोर्ट से बाबा रामदेव को फटकार लगने के बाद पतंजलि ने अखबारों में माफीनामा छापा.
  • माफीनामा छपवाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माफीनामे के साइज को लेकर फटकार लगाया. कोर्ट ने कहा कि माफीनामा उतना ही बड़ा होना चाहिए जितना विज्ञापन होते हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने बिना शर्त माफी मांगने की बात कही चाहिए.
  • इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पतंजलि ने 24 अप्रैल को पहले से बड़े आकार का एक और माफीनामा छापवाया. इस माफीनामे में बिना शर्त माफी मांगी गई.