साउथ कश्मीर के जंगलों में छिपे हैं पहलगाम के हमलावर, एनआईए के पास इनपुट!

जांच एजेंसियों ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिनसे पता चला है कि हमला कितनी भयावह सटीकता के साथ किया गया था. बैसरन घास के मैदान में पर्यटक फंस गए थे हमलावरों ने प्रवेश और निकास द्वार दोनों को बंद कर दिया था.

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Gyanendra Sharma

पहलगाम में हमला करने वाले आतंकी एक सप्ताह ले गायब हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी के सूत्रों ने दावा किया है कि हमलावर अभी सक्रिय हैं और दक्षिण कश्मीर में छिपे हुए हैं. जांच पर करीबी नजर रखने वाले सूत्रों ने बताया कि विश्वसनीय इनपुट से पता चलता है कि इस क्षेत्र में अभी भी और आतंकवादी छिपे हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए हमले के दौरान, अतिरिक्त आतंकवादियों के कुछ दूरी बनाए रखने का संदेह था. 

जांच एजेंसियों ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिनसे पता चला है कि हमला कितनी भयावह सटीकता के साथ किया गया था. बैसरन घास के मैदान में  पर्यटक फंस गए थे, हमलावरों ने प्रवेश और निकास द्वार दोनों को बंद कर दिया था. 

तीन आतंकवादियों ने अनजान भीड़ पर गोलियां चलाईं

सूत्रों के अनुसार, हमले को चार आतंकवादियों ने अंजाम दिया. दो मुख्य द्वार से घुसे, एक निकास द्वार पर तैनात था, तथा चौथे के बारे में संदेह है कि वह सहायता प्रदान करने के लिए आसपास के देवदार के जंगल में छिपा हुआ था. तीन आतंकवादियों ने अनजान भीड़ पर गोलियां चलाईं, जो पिकनिक मना रहे थे, टट्टू की सवारी कर रहे थे या खाने के स्टॉल पर स्नैक्स का आनंद ले रहे थे. हमलावरों में से दो ने सेना की वर्दी पहन रखी थी, जबकि तीसरे ने पारंपरिक कश्मीरी फेरन पहना हुआ था. पहली गोली निकास द्वार के पास चली, जिससे दहशत फैल गई. जैसे ही पर्यटक प्रवेश द्वार की ओर भागे, वहां पहले से ही खड़े दो लोगों ने उन पर घात लगाकर हमला कर दिया.

हमला कर दीवार फांद भागे आतंकी

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आतंकवादियों ने कथित तौर पर महिलाओं को पुरुषों से और हिंदुओं को मुसलमानों से अलग करने का प्रयास किया. जब भीड़ ने मना कर दिया, तो हमलावरों ने लोगों से कलमा पढ़ने के लिए कहा. कुछ ही क्षणों बाद उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. सबसे पहले पीड़ितों में नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शामिल थे. 

सबसे ज़्यादा मौतें चाय और भेलपुरी की दुकानों के पास हुईं, जहां बहुत से पर्यटक जमा थे. बताया जाता है कि नरसंहार के बाद आतंकवादी पार्क के बाईं ओर की दीवार फांदकर भाग गए.