GST Tax Slab: 'वन नेशन, वन टैक्स' को एक राष्ट्र 9 कर में बदला', सरकार के जीएसटी सुधारों पर विपक्ष ने ऐसे कसा तंज

जीएसटी काउंसिल ने ट्रैक्स स्लैब को सरल बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है. सरकार ने मौजूदा चार स्लैब को घटाकर दो स्लैब (5% और 18%) कर दिया गया है, साथ ही स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी से छूट दी गई है.

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Garima Singh

GST Tax Slab: जीएसटी काउंसिल ने ट्रैक्स स्लैब को सरल बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है. सरकार ने मौजूदा चार स्लैब को घटाकर दो स्लैब (5% और 18%) कर दिया गया है, साथ ही स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी से छूट दी गई है. इसके अलावा, विलासिता की वस्तुओं पर 'पाप' कर लगाने का निर्णय लिया गया है. इस सुधार पर जहां कुछ विपक्षी दलों ने सतर्क समर्थन जताया है, वहीं कांग्रेस ने इसे संदेह की नजर से देखा है.

जीएसटी परिषद ने 12% और 28% स्लैब को खत्म कर केवल 5% और 18% की दरें बरकरार रखी हैं. सूत्रों के अनुसार, जीएसटी राजस्व का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा इन्हीं दो दरों से प्राप्त होता है. सरकार का कहना है कि आठ वर्षों के डेटा के आधार पर यह बदलाव कर प्रणाली को सरल और प्रभावी बनाने के लिए किया गया है. केंद्रीय कनिष्ठ वित्त मंत्री पंकज चौधरी ने इसे "समय की मांग" करार देते हुए कहा, "इन सुधारों का उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना और नागरिकों को राहत प्रदान करना है. शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान और मध्यम वर्ग को इससे लाभ होगा."

कांग्रेस ने साधा निशाना 

कांग्रेस ने इस सुधार को 'जीएसटी 1.5' करार देते हुए सरकार पर तंज कसा. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "मोदी सरकार ने 'एक राष्ट्र, एक कर' को 'एक राष्ट्र, 9 कर' में बदल दिया है." उन्होंने 0.25%, 1.5%, 3% और 6% की विशेष दरों का उल्लेख करते हुए जटिल अनुपालनों को सरल करने की मांग दोहराई. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार पर देरी से सुधार करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "जीएसटी को तर्कसंगत बनाना और कई वस्तुओं व सेवाओं पर करों में कमी स्वागत योग्य है, लेकिन यह आठ साल की देरी से आया है... हम पिछले आठ सालों से जीएसटी के डिज़ाइन और दरों के खिलाफ ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ उठा रहे हैं."वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने सुधार का स्वागत करते हुए कहा, "जीएसटी स्लैब में लंबे समय से लंबित सुधार की मांग अब कर दी गई है, अब समय आ गया है कि जीएसटी वास्तव में भारत और भारतीयों के लिए काम करे!" तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने बीमा प्रीमियम पर छूट को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मांग का परिणाम बताया.

राज्यों की चिंता: राजस्व पर असर

तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु ने टैक्स कटौती से राजस्व में कमी की आशंका जताई. उन्होंने सुझाव दिया कि या तो उपकर प्रावधान को संवैधानिक संशोधन के जरिए जारी रखा जाए या विलासिता की वस्तुओं पर कर बढ़ाया जाए. गैर-भाजपा शासित राज्यों ने भी राजस्व घाटे पर चिंता व्यक्त की है.

सरकार का क्या है रुख?

सरकार ने दावा किया कि खपत में वृद्धि से राजस्व घाटे की भरपाई होगी. जेडीयू के राजीव रंजन ने इसे "त्योहारी बंपर उपहार" और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसे "गरीब-समर्थक और विकासोन्मुखी" बताया.