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बॉर्डर पर 'युद्ध' जैसी तैयारी! पंजाब से कश्मीर तक अचानक छाया अंधेरा; जानें क्यों जारी हुआ ब्लैकआउट हाई अलर्ट

पंजाब और जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए ब्लैकआउट मॉक ड्रिल की गई. अमृतसर और लुधियाना समेत कई जिलों में सायरन बजते ही बिजली काटकर आपातकालीन स्थितियों का अभ्यास किया गया.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: उत्तर भारत के सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा के प्रति सजगता बढ़ाने के लिए एक बड़ी कवायद की गई है. शुक्रवार की रात पंजाब और जम्मू-कश्मीर के आसमान में अंधेरा छा गया, जब प्रशासन ने सुनियोजित तरीके से ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया. गृह मंत्रालय के निर्देशों पर हुई इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित हवाई हमले या आपात स्थिति के दौरान नागरिक सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की वास्तविक क्षमताओं की जांच करना था.

अमृतसर और लुधियाना जैसे बड़े शहरों में रात आठ बजे से सवा आठ बजे तक बिजली की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई. अमृतसर के रणजीत एवेन्यू और लुधियाना के पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी जैसे इलाकों में सायरन बजते ही लोगों ने अपने घरों की लाइटें बंद कर दीं. धार्मिक स्थलों से भी लगातार घोषणाएं की जा रही थीं ताकि लोग इस अभ्यास में शामिल हों. बिजली विभाग ने सावधानीपूर्वक ग्रिड से सप्लाई काट दी थी.

जम्मू-कश्मीर और देहरादून में भी तैयारी 

पंजाब के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में भी गुरुवार शाम को ऐसी ही मॉक ड्रिल देखने को मिली थी. वहां भी बिजली गुल होने से पूरा बाजार और रिहायशी इलाके अंधेरे में डूब गए थे. इसके अलावा, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी रात 10 बजे से आधे घंटे के लिए ब्लैकआउट अलर्ट जारी किया गया. इन ड्रिल के माध्यम से प्रशासन सुरक्षा व्यवस्थाओं और अधिकारियों के रिस्पॉन्स टाइम की बारीक जांच कर रहा है.

कई सुरक्षा एजेंसियों का संयुक्त अभ्यास 

इस मॉक ड्रिल को सफल बनाने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर काम किया. सिविल डिफेंस और NCC के वालंटियर्स ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास केवल कागजी न होकर वास्तविक समय की स्थितियों को समझने के लिए था. इसमें संचार प्रणाली से लेकर फील्ड रिस्पॉन्स तक हर स्तर पर सामंजस्य बिठाने की कोशिश की गई.

जनता के लिए सख्त दिशा-निर्देश 

प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से अपील की थी कि ड्रिल के दौरान किसी भी वैकल्पिक प्रकाश स्रोत जैसे टॉर्च, मोमबत्ती, जनरेटर या मोबाइल लाइट का इस्तेमाल न करें. सुरक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ऊंचाई से देखने पर पूरा इलाका पूरी तरह अंधेरा नजर आए. हालांकि, इस दौरान अस्पताल और फायर स्टेशनों जैसी आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई थी ताकि किसी भी आपात स्थिति में कोई वास्तविक समस्या न आए.

'ऑल क्लियर' संदेश के साथ समापन 

अभ्यास पूरा होने के बाद प्रशासन ने दो मिनट तक लगातार सायरन बजाकर 'ऑल क्लियर' संदेश जारी किया. इसके तुरंत बाद बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी गई. अमृतसर जिला प्रशासन के अनुसार, यह नागरिक सुरक्षा एयर रेड ड्रिल भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का एक एहतियाती तरीका है. इस सफल आयोजन के बाद अब फीडबैक के आधार पर सुरक्षा प्रोटोकॉल में जरूरी सुधार किए जाएंगे और भविष्य की रूपरेखा तैयार होगी.