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बेटे अरुण योगीराज की बनाई रामलला मूर्ति चयन पर मां ने खुशी का किया इजहार, बोली- 'खुशी का पल.. जाऊंगी अयोध्या..'

मूर्तिकार अरुण योगीराज की ओर से बनाये गए भगवान रामलला की मूर्ति को लेकर उनकी मां सरस्वती ने खुशी जाहिर की.

Avinash Kumar Singh

नई दिल्ली: मूर्तिकार अरुण योगीराज की ओर से बनाये गए भगवान रामलला की मूर्ति को लेकर उनकी मां सरस्वती ने खुशी जाहिर की. बेटे की ओर से बनाए गए भगवान रामलला की मूर्ति चयन को लेकर मां सरस्वती ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं. यह पिछले छह महीनों में उसने जो किया उसका परिणाम है. यह हमारे लिए सबसे खुशी का पल है, मैं उन्हें मूर्ति बनाते हुए देखना चाहता था, लेकिन उन्होंने कहा कि वह मुझे आखिरी दिन ले जाएंगे. मैं रामलला प्राण प्रतिष्ठा के दिन जाऊंगी. मैं अपने बेटे की प्रगति और उसकी सफलता को देखकर खुश हूं. उसके पिता उसकी सफलता को देखने के लिए मौजूद नहीं हैं, मेरे बेटे को अयोध्या गए 6 महीने हो गए हैं. मेरे तीन बच्चे हैं. सूर्य प्रकाश, चेतना और अरुण. हम कई वर्षों से इस मूर्तिकला में लगे हुए हैं. चार पीढ़ियां हो गई हैं.

मूर्तिकार अरुण योगीराज की मूर्ति का चयन 

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कहा कि मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई राम लला की मूर्ति को अयोध्या के ऐतिहासिक मंदिर में स्थापना के लिए चुना गया है. ट्रस्ट ने एक्स पोस्ट में लिखा कि प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा कृष्ण शिला पर गढ़ी गई मूर्ति को भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह के रूप में चुना गया है.

चंपत राय ने अरुण योगीराज के समर्पण की तारीफ की 

रामलला की मूर्ति के चयन की प्रक्रिया के दौरान अरुण योगीराज की ओर से बनाई गई मूर्ति का चयन किया गया. सभी ट्रस्टियों ने उनके कार्य की सराहना की है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अरुण योगीराज के काम के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा कि मूर्ति बनाते समय काम में कोई विघ्न न आए इसके लिए उन्होंने महीनों तक अपने परिवार वालों से बात तक नहीं की. उन्होंने बच्चों का चेहरा भी नहीं देखा. प्रतिमा निर्माण कार्य के दौरान अरुण योगीराज ने जिस तरह अपना जीवन व्यतीत किया उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. काम के दौरान उन्होंने महीनों तक फोन तक नहीं छुआ, यहां तक ​​कि वह अपने बच्चों और परिवार से भी बात नहीं करते थे. अरुण योगीराज कई पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण के काम से जुड़े हुए हैं. उनके पूर्वज भी यही काम करते आये हैं.जानकारी के मुताबिक उन्होंने ही केदारनाथ में शंकराचार्य की मूर्ति बनाई थी. उन्होंने दिल्ली में इंडिया गेट के नीचे सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति भी बनाई है. 

रामलला प्राण प्रतिष्ठा के लिए 84 सेकंड का मुहूर्त

रामलला प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. प्राण प्रतिष्ठा से पहले की औपचारिक प्रक्रियाएं आज से यानी 16 जनवरी से शुरू होंगी और 21 जनवरी तक जारी रहेंगी. 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 84 सेकंड का अति सूक्ष्म मुहूर्त निकाला गया है. जो 12 बजकर 29 मिनट 8 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकंड तक होगा. मध्‍याह्न काल में मृगशिरा नक्षत्र में 84 सेकेंड के मुहूर्त में प्रधानमंत्री मोदी रामलला के विग्रह की आंखों में बंधी पट्टी यानी दिव्‍य दृष्टि खोलने के बाद काजल व टीका लगाने के साथ-साथ भगवान रामलला की महाआरती करेंगे.