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मानहानि मामले में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को कोर्ट ने सुनाई सजा, जेल के साथ देना होगा इतना जुर्माना

Medha Patkar: प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को मानहानि के मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सजा सुनाई. कोर्ट ने अपने फैसले में उन्हें पांच महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई है. इसके अलावा कोर्ट ने उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह मामला मौजूदा समय में दिल्ली के LG वी के सक्सेना की मानहानि से जुड़ा हुआ है.

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India Daily Live

Medha Patkar: दिल्ली की साकेत कोर्ट ने प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को मानहानि के एक मामले में पांच महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट ने यह सजा तत्कालीन केवीआईसी अध्यक्ष और वर्तमान में दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना की ओर से दायर मानहानि के मामले में सुनाई है. मेधा पाटकर लंबे समय से सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी रही हैं और वह नर्मदा बचाओ आंदोलन की वजह से देशभर में चर्चित भी हुई हैं. 

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उनके स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए उन्हें ज्यादा सजा नहीं दी जा रही है. इसके अलावा, उनकी सजा 30 दिनों तक निलंबित रहेगी जिससे वह इस आदेश के खिलाफ अपील कर सकें. मेधा पाटक ने कोर्ट में जमानत याचिका भी दायर की थी. 24 मई को अदालत ने पाटकर को आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराया था और आज उसी पर सजा सुनाई गई है. 

अदालत के फैसले को देंगी चुनौती 

दिल्ली के साकेत कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और नर्मदा आंदोलन की प्रमुख नेता मेधा पाटकर को मानाहानि मामले का दोषी पाया है. मेधा के ऊपर तत्कालीन केवाआईसी अध्यक्ष वी के सक्सेना की ओर से याचिका दायर की गई थी. अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए पाटकर ने कहा, 'सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता. हमने किसी को बदनाम करने की कोशिश नहीं की हम केवल अपना काम करते हैं हम अदालत के फैसले को चुनौती देंगे.' 

क्या है पूरा मामला? 

मेधा पाटकर और वी के सक्सेना के बीच साल 2000 से कानूनी लड़ाई चल रही है जब पाटकर ने उनके और नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) के खिलाफ विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए वी के सक्सेना के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. वी के सक्सेना ने 2001 में पाटकर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था जब वह अहमदाबाद स्थित एनजीओ नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के प्रमुख थे.

मेधा पाटकर ने 'देशभक्त का असली चेहरा' शीर्षक से एक प्रेस नोट जारी किया जिसमें वी.के. सक्सेना को 'कायर' कहा और उन पर गुजरात के लोगों और उनके संसाधनों को विदेशी हितों के लिए गिरवी रखने का आरोप लगाया.