मनोज जरांगे ने खत्म की भूख हड़ताल, महाराष्ट्र सरकार ने मानी मराठा आरक्षण की मांग

महाराष्ट्र सरकार ने मनोज जरांगे की मराठा आरक्षण की मांग को मान लिया है, जिसके बाद आरक्षण को लेकर आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे जरांगे ने भूख हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया है.

Manoj Jarange ends his hunger strike Maharashtra government accepts Maratha reservation demand
Sagar Bhardwaj

महाराष्ट्र सरकार ने मनोज जरांगे की मराठा आरक्षण की मांग को मान लिया है, जिसके बाद आरक्षण को लेकर आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे जरांगे ने भूख हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया है. जरांगे ने कहा कि सरकार ने हमारी अधिकतम मांगों को मान लिया है. अनशन खत्म करने का ऐलान करते हुए जरांगे ने कहा, 'हम जीत गए.' जरांगे ने कहा कि अगर सरकार आरक्षण की मांगों को लेकर जीआर (सरकारी आदेश) जारी कर देती है तो वह आज रात 9 बजे तक मुंबई छोड़ देंगे.

सरकार ने मांगी दो मुख्य मांगें

पिछले चार दिनों से आजाद मैदान में भूख हड़ताल कर रहे जरांगे ने कहा कि मराठावाड़ा के मराठा समुदाय को कुंबियों की तरह ओबीसी का दर्जा देने की प्रमुख मांग को सरकार ने मान लिया है. हैदराबाद राजपत्र के क्रियान्वयन के लिए सरकारी प्रस्ताव दिन में बाद में जारी किया गया जिसके अनुसार, सत्यापन के बाद कुंबी जाति के प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे.

मराठावाड़ा क्षेत्र पहले हैदराबाद रियासत का हिस्सा था. निजामी सरकार द्वारा जारी हैदराबाद गजट में मराठा समुदाय को कुंबियों का दर्जा दिया गया था और उन्हें नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिया गया था. महाराष्ट्र की 30% प्रतिशत आबादी मराठा समुदाय से आती है, जिसका राज्य में जबरदस्त प्रभाव एवं दखल है.

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस खत्म

जरांगे ने कहा कि सरकार ने सितंबर के अंत तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी केस वापस लेने का भी ऐलान किया है. 
इसके अलावा मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को दो हफ्ते के भीतर मुआवजा देने पर भी सहमति बनी है.

तलाशेंगे कानूनी विकल्प

महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधियों ने जरांगे से मुलाकात कर कहा कि सरकार मराठाओं को कुंबियों के समान दर्जा देने के कानूनी विकल्प तलाशेगी. उन्हें बताया गया कि इस प्रक्रिया में दो हफ्तों का समय लग सकता है. गौरतलब है कि जरांगे ने 4000 प्रदर्शनकारियों के साथ मुंबई के आजाद मैदान में 29 अगस्त को हड़ताल शुरू की थी. उन्होंने ओबीसी समुदाय के तहत मराठाओं को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत कोटा देने की मांग की थी.