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Maharashtra Polls: CM माझी लड़की बहन योजना से महिला सशक्तिकरण की नई दिशा, महिलाओं की आर्थिक स्थिति होगी बेहतर

मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना का प्रमुख लक्ष्य 21 से 65 साल की उम्र की महिलाओं को हरमहीनें 15,000 रुपए की फाइनेंशियल मदद देना है. इस योजना से महिलाएं न केवल अपने घर की आर्थिक स्थिति में सुधार कर रही हैं.

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Mayank Tiwari

Maharashtra Assembly Election 2024: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने 28 जून 2024 को सूबे के मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना की शुरुआत की, जिसका मकसद महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत बनाना था. इस योजना ने न केवल महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की, बल्कि उन्हें अपने कारोबार शुरू करने का एक मौका भी दिया. 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना का प्रमुख लक्ष्य 21 से 65 साल की उम्र की महिलाओं को हरमहीनें 15,000 रुपए की फाइनेंशियल मदद देना है. इस योजना से महिलाएं न केवल अपने घर की आर्थिक स्थिति में सुधार कर रही हैं, बल्कि वे अपने कारोबार को भी तेजी से बढ़ा रही हैं. हालांकि,  अब तक करीब 2.5 करोड़ महिलाओं ने इस योजना के लिए आवेदन किया है. जिसका काफी पॉजिटिव प्रभाव देखा गया है. 

जानें महिलाओं के सफल कारोबार की कहानियां?

महाराष्ट्र सरकार की इस योजना के तहत महिलाएं कई क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं. अगर, मैं उदाहरण दू तो, एक महिला ने कपड़ों के कारोबार में 7,500 रुपए के शुरुआती इनवेस्टमेंट से 15,000 रुपए का फायदा लिया. इस तरह से इस योजना की सफलता और महिलाओं के लिए कामयाब साबित हो रही है. वहीं, एक लाभार्थी ने इस्त्री कारोबार शुरू किया और सफलतापूर्वक उसे चलाया था.ऐसी कहानियां महिलाओं के कारोबार से जुड़े क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी को दर्शाती हैं.

महाराष्ट्र सरकार की वित्तीय स्थिरता और समर्थन

इस योजना के फंडिंग पर उठे सवालों के जवाब में, महाराष्ट्र सरकार ने बजट में 46,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिससे इसकी वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की गई है. इसके अलावा, रक्षा बंधन पर सरकार ने इस योजना के लिए 7,500 रुपए का स्पेशल नियम लागू किया है. जो सरकार की महिला सशक्तिकरण के प्रति मजबूती को दर्शाता है.

महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम

मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से समर्थ बना रही है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही है. महिलाएं अब अपने भविष्य को स्वनिर्धारित करने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रही हैं, और यह सरकार के समर्पण का प्रतीक बन चुका है.