Jamia Millia Islamia: भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव का माहौल बना हुआ है. ऐसे में जिन देशों ने आतंकिस्तान की मदद की है उन्हें भारी कीमत अदा करनी होगी. ये सख्त संदेश इस वक्त हमारा देश दे रहा है. दोनें दशों के बीच तुर्की ने खुब मजे लिए हैं. अब तुर्की को भी इसका अंजाम भुगतना होगा. देश भर में तुर्की के खिलाफ लोगों में आक्रोश है. यही वजह की अब लोग तुर्की को बायकॉट कर रहे है. तुर्की से आए सामान को भी लोग बायकॉट कर रहे है. कल देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में शुमार जवाहर लाल नेहरु ने तुर्की को तगड़ा झटका दिया. अब
जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए तुर्की के सभी शैक्षणिक संस्थानों के साथ अपने अकादमिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को निलंबित करने की घोषणा की है. यह निर्णय भारत और तुर्की के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच लिया गया है, खासकर क्षेत्रीय संघर्षों में पाकिस्तान के लिए तुर्की के कथित समर्थन को लेकर. कानपुर विश्वविद्यालय ने तुर्की के इस्तांबुल विश्वविद्यालय के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) को भी रद्द कर दिया है.
Due to national security considerations, any Memorandum of Understanding (MoU) between Jamia Millia Islamia, New Delhi, and any institution affiliated with the Government of the Republic of Türkiye stands suspended with immediate effect, until further orders.
— Jamia Millia Islamia (NAAC A++ Grade Central Univ) (@jmiu_official) May 15, 2025
Jamia Millia…
इस बीच, दिल्ली विश्वविद्यालय भी अपने अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक समझौतों की समीक्षा कर रहा है. इस पर एक अधिकारी ने कहा, "हम सभी एमओयू की समीक्षा कर रहे हैं और समीक्षा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा."
14 मई को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने तुर्की के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ अकादमिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को रोक दिया, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों का हवाला दिया. एक बयान में, जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने कहा, "एमओयू जेएनयू द्वारा हस्ताक्षरित अन्य अकादमिक समझौतों की तरह ही था, जिसका उद्देश्य शोध और शिक्षण में सहयोग को बढ़ावा देना था. एसएलएल एंड सीएस में एक संकाय सदस्य भाषा, साहित्य और संस्कृति पर केंद्रित है, जबकि एसआईएस विश्व मामलों में तुर्की के साथ जुड़ता है. हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से, एमओयू को निलंबित कर दिया गया है, क्योंकि जेएनयू राष्ट्र और सशस्त्र बलों के साथ मजबूती से खड़ा है, जिनमें से कई जेएनयू के गौरवशाली पूर्व छात्र हैं."
यह समझौता ज्ञापन मूल रूप से अकादमिक सहयोग, शोध आदान-प्रदान और छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए हस्ताक्षरित किया गया था, जो भारतीय विश्वविद्यालयों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है. हालाँकि, हाल ही में कूटनीतिक तनाव, जिसमें पाकिस्तान के साथ तुर्की का बढ़ता रक्षा सहयोग शामिल है, ने संभावित सुरक्षा जोखिमों पर चिंताएँ बढ़ा दी हैं.
जेएनयू जो की एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है उसने माइक्रोब्लॉगिंग साइट X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी.
Due to National Security considerations, the MoU between JNU and Inonu University, Türkiye stands suspended until further notice.
— Jawaharlal Nehru University (JNU) (@JNU_official_50) May 14, 2025
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