T20 World Cup 2026

भारत ने एक हफ्ते में दूसरी बार बांग्लादेश के उच्चायुक्त को किया तलब, पड़ोसी देश में भारत विरोधी हिंसक प्रदर्शन के बाद तनावपूर्ण हुए संबंध

भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव और गहरा गया है. एक सप्ताह में दूसरी बार भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब किया, जबकि दोनों देशों ने एक-दूसरे की राजनयिक सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है.

social media
Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों में खटास खुलकर सामने आने लगी है. मंगलवार को भारत सरकार ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया. 

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया, जब कुछ घंटे पहले ही ढाका ने नई दिल्ली में अपने मिशनों से जुड़े घटनाक्रम को लेकर भारत के समक्ष गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी. बीते दिनों हिंसक प्रदर्शनों और आरोप-प्रत्यारोप ने दोनों देशों के रिश्तों को संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है.

एक सप्ताह में दूसरी बार तलब

मंगलवार को बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को भारत के विदेश मंत्रालय ने बुलाया. यह एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार है, जब उन्हें तलब किया गया. इससे पहले भारत ने बांग्लादेश में सुरक्षा हालात बिगड़ने और ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के लिए खतरे को लेकर कड़ा संदेश दिया था.

ढाका की आपत्ति और आरोप

भारत की कार्रवाई से पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को बुलाया. ढाका ने 20 दिसंबर को नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग और उच्चायुक्त आवास के बाहर हुई घटनाओं तथा 22 दिसंबर को सिलीगुड़ी स्थित वीजा सेंटर में तोड़फोड़ पर गहरी चिंता जताई.

MEA ने क्या कहा

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी तत्व भारतीय मिशन के आसपास सुरक्षा चुनौती पैदा करने की बात खुले तौर पर कह रहे हैं. MEA ने यह भी साफ किया कि हालिया घटनाओं को लेकर भारत के खिलाफ फैलाई जा रही 'झूठी कहानी' को वह पूरी तरह खारिज करता है.

जांच को लेकर सवाल

भारत ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अब तक न तो इन घटनाओं की व्यापक जांच कर पाई है और न ही कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत साझा किए गए हैं. इस चुप्पी ने भारत की चिंताओं को और बढ़ा दिया है.

तनाव के पीछे की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हाल ही में बांग्लादेश के एक नेता द्वारा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, यानी ‘सेवन सिस्टर्स’, को अलग-थलग करने की धमकी भी दी गई थी. हालांकि विदेश मंत्रालय ने इसे सीधे तौर पर बयान में शामिल नहीं किया, लेकिन माना जा रहा है कि बढ़ते तनाव की जड़ें इन्हीं बयानों और हालिया हिंसक प्रदर्शनों से जुड़ी हैं.