भारत-न्यूजीलैंड ने ऐतिहासिक FTA पर किए हस्ताक्षर, भारतीय कपड़ों और जूतों की कीवी बाजार में टैक्स फ्री एंट्री; जानिए अन्य फायदे
भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए. यह डील भारतीय निर्यात पर 100% शुल्क हटाती है और पेशेवरों के लिए 5,000 वार्षिक वीजा के साथ निवेश के नए द्वार खोलती है.
नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के आर्थिक संबंधों में सोमवार को नई इबारत लिखी गई. दोनों देशों ने सफलतापूर्वक अपनी वार्ता पूरी करते हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए. यह समझौता दोनों देशों के साझा भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर एक बड़ा मील का पत्थर करार दिया है.
यह समझौता कुल 20 अध्यायों में फैला हुआ है, जिसमें माल के व्यापार से लेकर विवाद समाधान और कानूनी प्रावधानों तक सब कुछ स्पष्ट किया गया है. पीयूष गोयल के अनुसार, मात्र नौ महीनों में इस विस्तृत डील को पूरा करना दोनों देशों के बीच भरोसे की गहराई को दर्शाता है. यह पिछले चार वर्षों में भारत का सातवां बड़ा व्यापारिक समझौता है. यह दिखाता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मंच पर एक मजबूत और सक्रिय खिलाड़ी बन चुका है.
भारतीय निर्यातकों के लिए खुला शुल्क-मुक्त द्वार
इस ऐतिहासिक समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय उत्पादों पर लगने वाले 100 प्रतिशत सीमा शुल्क की समाप्ति है. अब भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्र, जैसे कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामान न्यूजीलैंड के बाजार में शून्य ड्यूटी पर पहुंच सकेंगे. इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि लाखों भारतीय कारीगरों और उद्यमियों को नया बाजार मिलेगा. यह समझौता भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा.
पेशेवरों के लिए 5,000 वीजा और रोजगार के अवसर
समझौते में भारतीय युवाओं और पेशेवरों की जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा गया है. इसके तहत 'ओपन स्किल्ड एम्प्लॉयमेंट पाथवे' के जरिए भारतीय प्रोफेशनल्स को हर साल कम से कम 5,000 'अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा' दिए जाएंगे. यह वीजा पेशेवरों को तीन साल तक न्यूजीलैंड में रहकर काम करने की अनुमति देगा. यह कदम भारत के कुशल कार्यबल के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर की राह आसान करेगा और वैश्विक अनुभव प्राप्त करने का बड़ा मौका देगा.
वाइन व्यापार में रियायतें और निवेश की गारंटी
न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन डॉलर के भारी निवेश का वादा किया है. व्यापारिक वस्तुओं की बात करें तो, दोनों देशों के बीच वाइन और स्पिरिट के शुल्कों में रियायत दी गई है. न्यूजीलैंड की वाइन को भारत में रियायती दरों पर प्रवेश मिलेगा, जबकि भारतीय वाइन और स्पिरिट ड्यूटी-फ्री लाभ उठा सकेंगे. इन रियायतों को अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के घरेलू उद्योगों को संभलने का मौका मिले.
कृषि क्षेत्र में सहयोग और न्यूजीलैंड को लाभ
खेती के क्षेत्र में, न्यूजीलैंड भारतीय किसानों को कीवी, सेब और शहद के उत्पादन में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा. भारत ने न्यूजीलैंड के लिए अपनी 70.03 प्रतिशत टैरिफ लाइनें खोली हैं, जिससे वहां से आने वाले 95 प्रतिशत आयात को कवर किया गया है. न्यूजीलैंड को भारत में अपने ऊन, लकड़ी, कोयला और फलों जैसे ब्लूबेरी और एवोकैडो के निर्यात से बड़ा फायदा होगा. यह सहयोग भारत के कृषि ढांचे को आधुनिक बनाने में भी महत्वपूर्ण साबित होगा.