जमीन कब्जे के आरोपों पर हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार, गौरव गोगोई समेत इन कांग्रेस नेताओं पर ठोका 500 करोड़ का मानहानि केस

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जमीन कब्जे के आरोपों पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि केस किया है. चुनाव से पहले इस कानूनी दांव-पेच ने राज्य में सियासी हलचल बढ़ा दी है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: असम की राजनीति में इन दिनों आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं जितेंद्र सिंह, भूपेश बघेल और गौरव गोगोई के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर हजारों बीघा जमीन कब्जाने का गंभीर आरोप लगाया. अब सरमा ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर इसे महज एक राजनीतिक नाटक करार दिया है और मुआवजे के तौर पर भारी हर्जाने की मांग की है.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने पिछले हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज दावा किया था. उन्होंने कहा कि पार्टी की जांच में सामने आया है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने राज्य भर में लगभग 12,000 बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा है. गोगोई के इन तीखे हमलों ने चुनाव की दहलीज पर खड़े असम के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. इन आरोपों को सरमा ने पूरी तरह से आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया है.

मुख्यमंत्री का पलटवार 

आरोप लगने के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया था कि वे इसे बिना सबूतों के नहीं छोड़ेंगे. मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उन्होंने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है. सरमा ने सख्त लहजे में कहा कि वे 'गांधी परिवार के गुलामों' द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार या राजनीतिक ड्रामे से डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने इसे अपनी प्रतिष्ठा पर सीधा हमला बताया है.

पुरानी प्रतिद्वंद्विता और नए हमले 

हिमंत बिस्वा सरमा, जो 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, अब पुरानी पार्टी के खिलाफ हमलावर रुख अपनाए हुए हैं. उन्होंने पोस्ट किया कि 'हिट-एंड-रन' की राजनीति का दौर अब खत्म हो चुका है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं को चुनौती दी है कि अगर उनके पास जरा सा भी साहस या सबूत है, तो वे अदालत में हर आरोप को साबित करके दिखाएं. यह टकराव असम में चुनावी माहौल को और भी अधिक आक्रामक बना रहा है.

सुरक्षा और निजी हमले 

विवाद यहीं नहीं थमा. मुख्यमंत्री सरमा ने गौरव गोगोई पर एक नया मोर्चा खोलते हुए उन पर और उनकी ब्रिटिश पत्नी, एलिजाबेथ कोलबर्न पर पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख से गहरे संबंध होने का आरोप लगाया. मुख्यमंत्री ने यहां तक संकेत दिया कि खुफिया जानकारी पाकिस्तान को भेजी गई हो सकती है. इस नए आरोप ने पहले से ही गर्म चल रही राजनीति में आग में घी डालने का काम किया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट बढ़ गई है.

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

सरमा के इन आरोपों पर कांग्रेस ने भी तुरंत पलटवार किया. पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री के पास अपने दावों को पुख्ता करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है. कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, असम की धरती पर यह जुबानी जंग अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गई है, जिसका फैसला अब आने वाले समय में अदालत ही करेगी.