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लैंड रिकॉर्ड्स हुए डिजिटल, घर बैठे डाउनलोड करें दस्तावेज; गिरवी रखी जमीन का भी मिलेगा पूरा ब्योरा

सरकार ने जमीन के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण में बड़ी प्रगति की है. अब 19 राज्यों में लोग घर बैठे कानूनी रूप से मान्य लैंड रिकॉर्ड डाउनलोड कर सकेंगे, जबकि 406 जिलों में बैंक ऑनलाइन गिरवी जमीन की जांच कर पाएंगे.

Gemini AI
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: जमीन से जुड़े कामकाज को आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है. देश के 19 राज्यों में नागरिक अब घर बैठे जमीन के दस्तावेज डिजिटल रूप से डाउनलोड कर सकेंगे, जिन्हें कानूनी मान्यता भी प्राप्त होगी. इसके साथ ही बैंकों के लिए लोन प्रक्रिया भी तेज होगी, क्योंकि वे ऑनलाइन ही गिरवी रखी जाने वाली जमीन की जांच कर सकेंगे.

सरकार के मुताबिक भूमि संसाधन विभाग ने जमीन के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का काम लगभग पूरा कर लिया है. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि देश के 97.27 प्रतिशत गांवों में जमीन के अधिकार से जुड़े रिकॉर्ड यानी राइट्स ऑफ रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज किए जा चुके हैं. इससे जमीन से जुड़े विवाद कम होने और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है.

नक्शों से जोड़े गए जमीन के दस्तावेज

मंत्रालय के अनुसार लगभग 97.14 प्रतिशत जमीन के नक्शों का भी डिजिटलीकरण हो चुका है. 84.89 प्रतिशत गांवों में लिखित आरओआर को डिजिटल नक्शों से जोड़ दिया गया है. इससे जमीन की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेगी, जिससे प्रशासन और आम लोगों दोनों को सुविधा मिलेगी.

शहरों में नई सर्वे योजना पर काम

शहरी क्षेत्रों में जमीन की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नक्ष योजना यानी नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज बेस्ड लैंड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशन शुरू की गई है. इसके तहत 157 शहरी स्थानीय निकायों में काम चल रहा है. 116 शहरों में हवाई सर्वे पूरा हो चुका है और 21 शहरों में सर्वे का कार्य पूरी तरह समाप्त हो गया है.

बैंकों को ऑनलाइन जांच की सुविधा

डिजिटलीकरण का सीधा फायदा बैंकिंग सेक्टर को भी मिला है. अब 406 जिलों में बैंक ऑनलाइन ही गिरवी रखी जाने वाली जमीन की जांच कर सकेंगे. इससे लोन स्वीकृति की प्रक्रिया तेज होगी और आम लोगों को समय पर ऋण मिल सकेगा. सरकार ने 2025-26 के लिए 24 राज्यों को 1,050 करोड़ रुपये की सहायता भी मंजूर की है.

जमीन का आधार नंबर और रजिस्ट्रेशन सिस्टम

सरकार ने जमीन के लिए यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी यूएलपीआईएन भी लागू किया है. यह 14 अंकों का नंबर होता है और इसे जमीन का आधार कहा जा रहा है. साथ ही नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए जमीन की खरीद-बिक्री आसान हुई है. 17 राज्यों में इसे लागू किया जा चुका है और 88 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार कार्यालय आपस में जुड़ चुके हैं.