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मणिपुर में 2016 में बनाए गए नए 7 जिलों में ही क्यों हो रही हिंसा? CM N Biren Singh ने कांग्रेस को ठहराया दोषी

Manipur News: मणिपुर में 2016 में गठित किए गए नए सात जिलों को लेकर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि 2016 में ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार ने 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित होकर नए जिलों को निर्माण किया था.

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India Daily Live

Manipur News: भारत को पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर हिंसा को लेकर हमेशा चर्चा में बना रहता है. राज्य के कई जिलों में थोड़े-थोड़े समय में हिंसात्मक घटनाएं होती रहती है. पिछले साल जिस तरह से मणिपुर में महिलाओं के साथ हुआ उस घटना ने वैश्विक स्तर पर देश को शर्मसार करने का काम किया है. अधिकतर घटनाएं मणिपुर के उन जिलों में हो रही हैं जिन्हें 2016 में बनाया गया था. इस बारे में मणिपुर के वर्तमान मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने विधानसभा सत्र में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राज्य में जिलों का पुनर्गठन करना आवश्यक है. सीएम ने पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के 2016 के सात नए जिलों के गठन के फैसले को “राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित” करार दिया.

2016 में मणिपुर में 7 नए जिलों को गठन किया गया था. अब मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह उन जिलों के पुनर्गठन की बात कर रहे हैं. 2016 में गठित किए गए नए जिले ने मैतेई समुदाय को साल बाद यानी 2017 में राज्य में होने वाले चुनावों से पहले कुकी समुदाय से समर्थन जुटाने का अवसर भी प्रदान किया. 

सीएम बीरेन सिंह ने पूर्व सरकार पर लगाए कई आरोप

सीएम बीरेन सिंह ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों का हवाला देते हुए विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले दिसंबर 2016 में एक अधिसूचना के जरिए राज्य के नौ जिलों में से सात को विभाजित करके नए जिले बनाए थे. 

सीएम बीरेन सिंह ने कहा कि हालांकि पिछली कांग्रेस सरकार ने 2016 में नए जिलों के निर्माण का कारण प्रशासनिक दक्षता बताया था, लेकिन यह जातीय आधार पर था. इस गलती से जातीयों के बीच अंतर को बढ़ावा मिला. 

लोग खुद को मणिपुर नहीं मानते

सीएम बीरेन सिंह ने कहा कि यहां के लोग पहले खुद को मणिपुरी नहीं मानते. एक समुदाय जो किसी विशेष जिले में बहुसंख्यक है, वह खुद को भूमि का मालिक मानता है. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कांगपोकपी और चूड़ाचांदपुर के नागा निवासियों ने आवश्यक सेवाओं और अवसरों की कमी पर चिंता व्यक्त की है.

राज्य में पिछले एक साल से मैतेई और कुकी के बीच जातीय संघर्ष चल रहा है. ऐसे में जिलों के पुनर्गठन के बीरेन सिंह सरकार के प्रस्ताव का राज्य के राजनीतिक परिदृश्य सहित अन्य क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

4 जिलों में इस समुदाय के लोग बहुसंख्यक थे

नए जिलों के पुनर्गठन से पहले मैतेई समुदाय के लोग चार जिलों में बहुसंख्यक थे. यानी इम्फाल पूर्व, इम्फाल पश्चिम, थौबल और बिष्णुपुर में मैतेई की आबादी ज्यादा थी. वहीं, शेष पांच जिले उखरुल, सेनापति, चंदेल, तामेंगलोंग और चुराचांदपुर आदिवासी बहुल पहाड़ी जिले थे. चुराचांदपुर में कुकी जनजाति का प्रभुत्व था.

मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन 

सीएम ने यह भी आश्वासन दिया कि जिले की सीमाओं को “वास्तविक प्रशासनिक सुविधा” के आधार पर और नागरिक समूहों और जनजातियों के नेताओं के साथ परामर्श के बाद पुनर्गठित किया जाएगा.