देशभर में लू का प्रकोप जारी है. लोग सुबह से शाम तक एसी वाले ऑफिस, कार और घर में रह रहे हैं. कई लोग दिन में 20 घंटे से ज्यादा समय आर्टीपीशियल ठंडक में बिता रहे हैं. ऐसा करने से गर्मी से राहत तो मिल रही है, लेकिन लगातार एसी चलाने से शरीर पर बुरा असर पड़ रहा है. वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि एसी वाले कमरों में रहने वालों में सांस की बीमारियां और सिक बिल्डिंग सिंड्रोम ज्यादा देखा जाता है. फेफड़े विशेषज्ञों का मानना है कि एसी का गलत इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
एसी की कूलिंग कॉइल्स पर नमी जमा होती रहती है. अगर फिल्टर और ड्रेनेज साफ न किया जाए तो यह नमी बैक्टीरिया, फफूंद और फंगस के लिए आइडियल जगह बन जाती है. अध्ययनों के अनुसार, लेगियोनेला बैक्टीरिया एसी के पानी में पनपता है और हवा के साथ फेफड़ों में पहुंचकर लेगियोनेयर्स डिजीज जैसी गंभीर निमोनिया पैदा कर सकता है. गंदे वेंट से निकलने वाले फफूंद के spores एलर्जी, साइनस और लगातार खांसी का कारण बनते हैं.
एसी हवा से नमी सोख लेता है, जिससे कमरे की हवा बहुत सूखी हो जाती है. इससे आंखों की नमी सूख जाती है और ड्राई आई सिंड्रोम हो जाता है. कॉन्टैक्ट लेंस लगाने वालों को ज्यादा परेशानी होती है. त्वचा से प्राकृतिक तेल छिन जाता है, जिससे खुजली, रूखापन और एक्जिमा जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं. लंबे समय तक कम नमी में रहने से त्वचा की मरम्मत की क्षमता भी कम हो जाती है.
एसी वाले कमरे में हवा बार-बार घूमती रहती है, ताजी हवा नहीं आती. अगर फिल्टर 15-30 दिन में साफ न किया जाए तो धूल, पराग और फफूंद सांस के साथ शरीर में जाते हैं. डॉ. संदीप नायर कहते हैं कि इससे अस्थमा का अटैक, क्रॉनिक राइनाइटिस और सांस की नली में सूजन हो सकती है. ठंडी हवा सीधे सांस नली को प्रभावित कर ब्रोंकोस्पाज्म पैदा करती है.
45 डिग्री गर्मी से निकलकर 18 डिग्री एसी वाले कमरे में जाना शरीर के लिए बड़ा झटका है. इस अचानक तापमान बदलाव से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और नाक की अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है. नतीजा- वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम और मांसपेशियों में अकड़न बढ़ जाती है. बार-बार तापमान बदलने से शरीर पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है.
लंबे समय तक एसी में रहने से थकान, सिरदर्द और भारीपन महसूस होता है. बंद कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाता है, जिससे एकाग्रता कम होती है और दिमाग सुस्त पड़ जाता है. अध्ययनों में पाया गया है कि एसी वाले माहौल में लोग ज्यादा थकान महसूस करते हैं.