मुंबई: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ किस्से नहीं बल्कि सबक बन जाती हैं. कपूर खानदान की विरासत में भी एक ऐसा ही किस्सा जुड़ा है जिसने एक कलाकार को सुपरस्टार बना दिया. यह कहानी है उस दिन की जब एक पिता ने अपने बेटे को सहारा देने के बजाय उसे अकेला छोड़ दिया ताकि वह खुद इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना सके.
भारतीय सिनेमा में कपूर परिवार का नाम एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ा है. पृथ्वीराज कपूर से शुरू हुई यह परंपरा राज कपूर तक पहुंची और फिर आगे ऋषि कपूर ने इसे नई ऊंचाई दी. ऋषि कपूर ने बचपन में ही फिल्मों में कदम रख दिया था. उन्होंने फिल्म मेरा नाम जोकर में अपने पिता के बचपन का किरदार निभाया था. लेकिन असली पहचान उन्हें बाद में मिली.
साल 1973 में ऋषि कपूर ने बॉबी से बतौर हीरो डेब्यू किया. इस फिल्म में उनके साथ डिंपल कपाड़िया नजर आईं थी. इस फिल्म का निर्देशन खुद उनके पिता राज कपूर कर रहे थे. लेकिन सेट पर उनका व्यवहार बिल्कुल अलग था. वह वहां पिता नहीं बल्कि एक सख्त डायरेक्टर थे. ऋषि कपूर को सेट पर उन्हें साहब कहकर बुलाना पड़ता था. यह अनुशासन ही उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा था.
फिल्म के एक गाने की शूटिंग के दौरान ऋषि कपूर पूरी तरह तैयार थे. उन्हें उम्मीद थी कि कोई कोरियोग्राफर आएगा और उन्हें हर स्टेप सिखाएगा. लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी कोई नहीं आया. जब उन्होंने इसके बारे में पूछा तो जवाब ने उन्हें चौंका दिया. राज कपूर ने साफ कहा कि कोई कोरियोग्राफर नहीं आएगा. जो करना है खुद करना होगा.
उस समय ऋषि कपूर काफी घबरा गए थे. लेकिन तभी राज कपूर ने उन्हें एक ऐसी बात कही जो उनकी जिंदगी बदल गई. उन्होंने कहा कि अगर कोरियोग्राफर आएगा तो वह तुम्हें वैसे ही सिखाएगा जैसे अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को सिखाता है. फिर लोग तुम्हें तुम्हारी पहचान से नहीं बल्कि उनकी नकल के रूप में देखेंगे. इसलिए अपनी अलग पहचान खुद बनाओ.
यह बात ऋषि कपूर के दिल में बैठ गई. उन्होंने अपने डांस स्टाइल अपने एक्सप्रेशन और अपने रोमांटिक अंदाज को खुद तैयार किया. यही वजह रही कि जब उस दौर में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र एक्शन के बड़े चेहरे थे तब ऋषि कपूर ने रोमांटिक हीरो के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई. उनके गाने और स्टाइल आज भी लोगों के दिल में बसे हुए हैं.
बॉबी की सफलता ने ऋषि कपूर को रातों रात स्टार बना दिया. उनके गानों में उनकी सहजता और अलग अंदाज ने दर्शकों को खूब पसंद आया. यह सब उसी दिन की वजह से संभव हुआ जब उन्हें बिना किसी सहारे के खुद को साबित करना पड़ा.