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Karnataka SSLC Passing Marks: अब पास होना हुआ थोड़ा आसान, एसएसएलसी में कटे पासिंग मार्क्स, जानें क्या बदला

सरकार ने इस नियम के मसौदे को लेकर जनता से राय मांगी है. शिक्षक, अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञ अगले 15 दिनों में अपनी आपत्तियां या सुझाव भेज सकते हैं. इसके बाद कर्नाटक विद्यालय परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड (KSEAB) इसे अंतिम रूप देगा.

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Edited By: Reepu Kumari
Karnataka SSLC Passing Marks: अब पास होना हुआ थोड़ा आसान, एसएसएलसी में कटे पासिंग मार्क्स, जानें क्या बदला
Courtesy: Pinterest

Karnataka SSLC: कर्नाटक बोर्ड ने SSLC यानी कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है. अब परीक्षा पास करने के लिए 35% नहीं बल्कि सिर्फ 33% अंक लाने होंगे. इस बदलाव से उन छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो थोड़े अंकों से फेल हो जाते थे. राज्य सरकार ने यह बदलाव छात्रों पर से पढ़ाई का दबाव कम करने और ज्यादा से ज्यादा छात्रों को आगे की पढ़ाई का मौका देने के लिए किया है. हालांकि यह नियम 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगा, लेकिन इसके मसौदे पर जनता से 15 दिन के अंदर सुझाव भी मांगे गए हैं.

नई व्यवस्था के अनुसार अब कुल 625 अंकों में से कम से कम 206 अंक (33%) लाने पर छात्र पास माने जाएंगे. इसमें 125 अंक आंतरिक मूल्यांकन के और 500 अंक लिखित परीक्षा के होते हैं. हालांकि, हर विषय की लिखित परीक्षा में न्यूनतम 30% अंक (80 में से 24) लाना जरूरी होगा.

इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि पास होना आसान तो हो, लेकिन गुणवत्ता में कोई समझौता न हो. बोर्ड का कहना है कि यह बदलाव छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और उन्हें मेहनत करने की दिशा में प्रोत्साहित करेगा.

ग्रामीण और कमजोर वर्ग के छात्रों को मिलेगा सीधा फायदा

इस फैसले का सीधा असर उन छात्रों पर होगा जो आर्थिक रूप से कमजोर या ग्रामीण इलाकों से आते हैं और थोड़े अंकों से पीछे रह जाते हैं. शिक्षा विभाग का मानना है कि इस छोटे बदलाव से बहुत से छात्रों का साल बच जाएगा और उनका करियर आगे बढ़ेगा.

स्कूलों को अब आंतरिक मूल्यांकन में थोड़ी और आज़ादी दी गई है, जिससे वे छात्रों की काबिलियत के मुताबिक उन्हें नंबर दे सकें. हालांकि विभाग की नज  र अब भी इस बात पर रहेगी कि कोई छात्र विषय में बहुत कम प्रदर्शन न करे.

अब आप भी दे सकते हैं सुझाव

सरकार ने इस नियम के मसौदे को लेकर जनता से राय मांगी है. शिक्षक, अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञ अगले 15 दिनों में अपनी आपत्तियां या सुझाव भेज सकते हैं. इसके बाद कर्नाटक विद्यालय परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड (KSEAB) इसे अंतिम रूप देगा.

अगर यह नियम बिना ज्यादा विरोध के पारित हो जाता है, तो 2025-26 से SSLC परीक्षा पास करना थोड़ा और आसान हो जाएगा.