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बेटियों के लिए हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल खोलने की तैयारी, जानिए क्या है STEM योजना और कितना फायदेमंद

केंद्र सरकार देश के हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल खोलने की योजना पर तेजी से काम कर रही है. इसका लाभ ग्रामीण और दूरदराज की छात्राओं को मिलेगा.

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Edited By: Reepu Kumari
बेटियों के लिए हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल खोलने की तैयारी, जानिए क्या है STEM योजना और कितना फायदेमंद
Courtesy: GEMINI

ग्रामीण भारत की छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता अब आसान होने जा रहा है. घर से दूर कॉलेज, सुरक्षा की चिंता और रहने के सीमित विकल्प अक्सर पढ़ाई पर ब्रेक लगा देते थे. इस चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार ने हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है.

यह पहल सिर्फ एक इमारत बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों को भरोसा देने जैसा है, जो बेटियों को दूर भेजने से पहले सुरक्षित आवास की तलाश करते हैं. अब छात्राएं अपने सपनों के कोर्स बिना समझौते के चुन सकेंगी.

ग्रामीण शिक्षा को मिलेगा मजबूत आधार

केंद्र सरकार की योजना के तहत हर जिले में विशेष रूप से कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे. इसका सबसे बड़ा लाभ उन इलाकों को मिलेगा, जहां कॉलेज तो हैं, लेकिन छात्राओं के लिए सुरक्षित रहने की सुविधा कम है. विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे लड़कियों की पढ़ाई के फैसले में परिवारों की झिझक कम होगी. आवास की वजह से कोर्स न चुन पाने की समस्या अब बाधा नहीं बनेगी. यह योजना ग्रामीण शिक्षा के ढांचे में बड़ा सुधार साबित हो सकती है.

बजट 2026 में घोषणा की उम्मीद

शिक्षा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर वित्त मंत्रालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सूत्र बताते हैं कि 2026 के आम बजट में इसकी आधिकारिक घोषणा संभव है. मंजूरी मिलने के बाद 700 से 800 जिलों में हॉस्टल निर्माण का काम चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा.

इन हॉस्टलों में पढ़ाई के माहौल, सुरक्षा, इंटरनेट और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान रखा जाएगा. यह पहल उच्च शिक्षा में लड़कियों की पहुंच बढ़ाने के लक्ष्य को गति देगी.

राज्यों के साथ बनेगी साझा रणनीति

26 से 28 दिसंबर के बीच दिल्ली में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक प्रस्तावित है. इसमें उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 50 प्रतिशत तक ले जाने की रणनीति पर विचार होगा. साथ ही पढ़ाई बीच में छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या कम करने पर जोर दिया जाएगा. राज्यों से कहा गया है कि वे अपने स्तर पर कॉलेज शिफ्ट, नए संस्थान और डिजिटल शिक्षा के सुझाव पेश करें. यह बैठक भविष्य की शिक्षा दिशा तय करने में अहम होगी.

STEM को मिलेगा नई छात्राओं का बल

ग्रामीण इलाकों की कई होनहार छात्राएं विज्ञान और इंजीनियरिंग जैसे विषयों में रुचि तो रखती हैं, लेकिन कॉलेज के पास आवास न मिलने से दाखिला नहीं ले पाती थीं. अब हॉस्टल सुविधा से यह तस्वीर बदल सकती है. सरकार STEM कोर्स की सीटें बढ़ाने और छात्राओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी काम कर रही है.

कोच और शिक्षाविद मानते हैं कि यह सुविधा करियर आधारित कोर्स चुनने का आत्मविश्वास बढ़ाएगी और परिणामों में सुधार लाएगी.

ड्रॉपआउट रोकने पर सबसे बड़ा असर

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 2035 तक उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत महिला नामांकन का लक्ष्य तय है. फिलहाल यह आंकड़ा करीब 29 प्रतिशत के आसपास है. आवास और सुरक्षा चिंता ड्रॉपआउट का बड़ा कारण रही है.

हॉस्टल बनने से परिवारों का भरोसा बढ़ेगा और छात्राओं को कॉलेज के करीब रहने का सुरक्षित विकल्प मिलेगा. सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह कदम सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी मजबूत नींव रखेगा.