HDFC Bank Q3 preview: भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक HDFC बैंक इस साल के तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों की घोषणा 22 जनवरी 2024 को करने वाला है. बाजार और निवेशकों की नजर इस पर टिकी हुई है, क्योंकि बैंक के परिणामों में थोड़ी कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं. जानें, क्या हैं HDFC बैंक के तीसरी तिमाही के नतीजों की प्रमुख बातें और कैसे ये बैंक के शेयरों पर असर डाल सकते हैं.
विश्लेषकों के अनुसार, HDFC बैंक का कुल शुद्ध लाभ (Net Profit) तीसरी तिमाही में साल दर साल (YoY) 8 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है. हालांकि, बैंक की कर्ज वृद्धि (Loan Growth) धीमी रही है और मुनाफे के मार्जिन भी स्थिर बने हुए हैं. Q3FY25 के लिए बैंक का शुद्ध लाभ ₹16,650 करोड़ के आस-पास रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल की तीसरी तिमाही में यह ₹16,372 करोड़ था.
नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी ₹30,690 करोड़ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के ₹28,471 करोड़ से 1.6 प्रतिशत अधिक होगा.
HDFC बैंक की कर्ज वृद्धि Q3FY25 में सालाना 3 प्रतिशत तक सीमित रहने की संभावना है. बैंक ने अपने लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) को सुधारने पर ज्यादा ध्यान दिया है. हालांकि, कर्ज वृद्धि में कमी के कारण बैंक की कुल आय पर दबाव पड़ सकता है.
बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है और यह 3.6 प्रतिशत के आसपास बना रह सकता है. इसके पीछे मुख्य कारण HDFC बैंक द्वारा HDFC लिमिटेड के साथ मर्जर के बाद अपनी क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो को 100 प्रतिशत से नीचे रखने का प्रयास है. इस cautious approach के कारण मार्जिन वृद्धि धीमी पड़ी है, बावजूद इसके कि डिपॉजिट में अच्छा इज़ाफ़ा हुआ है.
किस चीज में गिरावट?
HDFC बैंक की संपत्ति की गुणवत्ता में भी गिरावट की आशंका जताई जा रही है. Citi Research ने अनुमान जताया है कि बैंक का ग्रॉस एनपीए (GNPA) अनुपात तीसरी तिमाही में 16 बासिस प्वाइंट्स (bps) बढ़ सकता है और यह 1.4 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. वहीं, नेट एनपीए (NNPA) भी 12 बासिस प्वाइंट्स बढ़ सकता है. ये आंकड़े पोस्ट-मर्जर की चुनौतियों को दर्शाते हैं, जो बैंक को अपने नतीजों में आने वाली परेशानियों के रूप में दिख रहे हैं.
HDFC बैंक के परिणामों पर मार्केट का रुख अब इस बात पर निर्भर करेगा कि ये नतीजे कितने सकारात्मक या नकारात्मक होते हैं. यदि बैंक के नतीजे अनुमान से बेहतर होते हैं तो शेयर में तेजी आ सकती है, लेकिन अगर परिणाम कमजोर आए तो इसका नकारात्मक असर शेयर कीमतों पर पड़ सकता है. चूंकि इस बार अनुमान काफी संकरे दायरे में हैं, इसलिए यदि कोई बड़ा सकारात्मक या नकारात्मक बदलाव होता है, तो यह बैंक के शेयर की कीमतों को तीव्र गति से प्रभावित कर सकता है.