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Stock Market Crash: क्या भारतीय शेयर बाजार में आ गई बड़ी मंदी! 9 सत्रों में सेंसेक्स हुआ बुरी तरह धड़ाम

यह समय दीर्घकालिक निवेशकों के लिए धैर्य रखने और धीरे-धीरे निवेश करने का हो सकता है. इस बीच, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आने वाले समय में बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है.

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Mayank Tiwari

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से भारी गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. इस बीच सेंसेक्स लगातार नौ सत्रों में 3,000 अंक गिर चुका है, जिससे निवेशकों को गंभीर नुकसान हो रहा है. इस दौरान छोटे और मिड-कैप शेयरों में यह गिरावट सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है, जहां खुदरा निवेशक भारी नुकसान उठा रहे हैं.

विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से भारी निकासी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजारों से 1 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है. यह निकासी वैश्विक निवेश परिस्थितियों की कठिनाई और उभरते बाजारों के प्रति सतर्कता के कारण हुई है. इस स्थिति में बाजार का गिरना और भी चिंताजनक हो गया है.

क्या भारतीय शेयर बाजार अब बियर ग्रिप में हैं?

दरअसल, निफ्टी की गिरावट का ये ट्रेंड साल 2019 के बाद का सबसे लंबा गिरावट हैय उस समय भी निफ्टी में 5% गिरावट आई थी, लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा चिंताजनक नजर आ रही है. लगातार FII द्वारा की जा रही बिक्री से रिकवरी की संभावनाएं कम होती जा रही हैं, जिससे बाजार में कमजोरी का माहौल बना हुआ है. ऐसे में निफ्टी के कई कम्पोनेंट्स अपने उच्चतम स्तर से 42% तक गिर चुके हैं, जिसमें टाटा मोटर्स की गिरावट प्रमुख है.

छोटे शेयरों की वैल्यूएशन पर विशेषज्ञों कीक्या है राय!

IME Capital के संस्थापक और CEO, आशी आनंद ने कहा, "छोटे शेयरों में 20% की गिरावट के बावजूद, हम अभी भी इनकी वैल्यूएशन को आकर्षक नहीं मानते. यदि कोई निवेश कर भी रहा है, तो इन शेयरों को महंगे ही कहा जा सकता है.

आने वाले समय में गिरावट की उम्मीद

कई बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि गिरावट का यह सिलसिला कुछ और समय तक जारी रह सकता है. तीसरी तिमाही के परिणामों ने केवल 5% की मामूली वृद्धि दिखाई, जिससे बाजार की सतर्कता बनी रही.

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद के अनुसार, "हम अधिकांश सेक्टरों और शेयरों में वैल्यू नहीं देख रहे, क्योंकि कई सेक्टरों में शेयर अभी भी महंगे हैं. बाजार में ओवरवैल्यूएशन बढ़ी है, और उच्च वैश्विक ब्याज दरों के साथ भारतीय बाजार में मंदी जारी रह सकती है.

मोतीलाल ओसवाल और एमके ग्लोबल का अनुमान

मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का मानना है कि FY26 में कॉर्पोरेट आय की उम्मीदें उच्च बनी रहेंगी, लेकिन आने वाले समय में और गिरावट की संभावना जताई जा रही है. एमके ग्लोबल के अनुसार, आने वाली तिमाही में बाजार दबाव में रह सकता है, लेकिन FY26 के पहले तिमाही में सुधार की उम्मीद है.

निवेशकों के लिए क्या करना चाहिए?

गियोजिट फाइनेंशियल सर्विसेज के विनोद नायर के अनुसार, "बाजार में 14% की गिरावट के बावजूद, आगे और गिरावट की संभावना सीमित है, क्योंकि लंबी अवधि के आर्थिक संकेतक मजबूत हैं. यदि कंपनियों का लाभ FY26 में अपने ऐतिहासिक औसत 15% पर लौटता है, तो बाजार अपनी गिरावट से उबर सकता है.