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सरकारी बॉन्ड्स में 7% कमाई का सुनहरा मौका! टाइमिंग पर नहीं, बल्कि रणनीति पर देना चाहिए ध्यान, निवेशकों को एक्सपर्ट्स की सलाह

भारत में 10 साल की सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड 7 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को ब्याज दरों का अनुमान लगाने की बजाय स्थिर रणनीति पर ध्यान देना चाहिए. अभी शॉर्ट से मीडियम टर्म बॉन्ड्स में अच्छा मौका है.

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Kuldeep Sharma

मुंबई: देश में 10 साल की जी-सेक(G-Sec) यानि सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड एक बार फिर 7 प्रतिशत के महत्वपूर्ण स्तर के पास पहुंच गई है. इस स्तर पर सरकारी बॉन्ड्स आय और पूंजी सुरक्षा दोनों के लिए आकर्षक विकल्प बन गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने की कोशिश करने की बजाय अपनी समग्र रणनीति पर फोकस करना चाहिए. आरबीआई की मोनेटरी पॉलिसी, इनइन्फ्लेशन और वैश्विक घटनाएं यील्ड को प्रभावित कर रही हैं. 

जी-सेक यील्ड 7% के करीब

वर्तमान स्तर पर 10 साल की G-Sec अच्छी यील्ड दे रही हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि ब्याज दर चक्र की चोटी का अनुमान लगाने की बजाय निवेशकों को स्थिर आय वाली रणनीति पर ध्यान देना चाहिए. आरबीआई की नीति दिशा और मुद्रास्फीति के रुख को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है.

आकर्षक यील्ड और सुरक्षा

इस समय G-Sec में निवेश से अच्छी आय और पूंजी की सुरक्षा दोनों मिल सकती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबी अवधि के बॉन्ड्स से बचें क्योंकि इन्फ्लेशन हाई रहने पर ड्यूरेशन रिस्क बढ़ सकता है. शॉर्ट से मीडियम टर्म (3-5 साल) बॉन्ड्स में कम जोखिम के साथ अच्छी यील्ड लॉक की जा सकती है.

स्थिर मुद्रास्फीति का फायदा

स्थिर मुद्रास्फीति और आरबीआई के न्यूट्रल या आसान नीति रुख से बॉन्ड्स को सपोर्ट मिलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि लिक्विडिटी, सरकारी उधार और बॉन्ड सप्लाई भी लंबी अवधि की यील्ड तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. निवेशकों को आरबीआई की टिप्पणियों पर नजर रखनी चाहिए.

निवेशकों को क्या समझना चाहिए

निवेशकों को समझना चाहिए कि ब्याज दर चक्र अनिश्चित रहता है. पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा इन यील्ड पर लॉक करना स्थिरता दे सकता है. अलग-अलग मैच्योरिटी में निवेश फैलाकर जोखिम को प्रबंधित किया जा सकता है. डायरेक्ट G-Sec रिटेल निवेशकों के लिए कुशल विकल्प साबित हो सकते हैं.

डायरेक्ट जी-सेक vs डेब्ट फंड

डायरेक्ट G-Sec में संप्रभु सुरक्षा और मैच्योरिटी तक निश्चित रिटर्न मिलता है, जबकि डेब्ट म्यूचुअल फंड प्रोफेशनल मैनेजमेंट और लिक्विडिटी देते हैं. वर्तमान चक्र में शॉर्ट से मीडियम ड्यूरेशन फंड्स या AAA रेटेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन क्रेडिट रिस्क से बचना चाहिए.